Aerospace Engineering

Aerospace Engineering: Is Difficult ? 

Aerospace engineering: यह इंजीनियरिंग क्षेत्र का एक बहुत ही कठिन कोर्स माना जाता है इस कोर्स में दाखिला लेने वाले स्टूडेंट को काफी मेहनत करनी होती है। Aerospace engineering: BTech का एक बहुत ही कठिन माने जाने वाला कोर्स है इस कोर्स में 12वीं के बाद दाखिला लिया जा सकता है। जो छात्र मैथ स्ट्रीम से 12वीं करते हैं। वह इसमें दाखिला लेते हैं इसमें दाखिला लेने के लिए जेईई मैंस या अन्य इंजीनियरिंग परीक्षा पास करनी होती है।


Aerospace engineering: को इंजीनियरिंग क्षेत्र की सबसे टफ कोर्स में रखा गया है। लेकिन इस कोर्स को एक बार कर लेने के बाद करोड़ों में सैलरी पैकेज मिलता है इसलिए एयरो स्पेस इंजीनियरिंग, का यह कोर्स काफी कठिन होता है क्योंकि इसमें टेक्नोलॉजी से रिलेटेड क्रिटिकल काम आते हैं। इस कोर्स को करने के बाद विदेश में काफी ज्यादा डिमांड होती है जिसमें करोड़ों में सैलरी ऑफर किया जाता है। लेकिन एयरो स्पेस इंजीनियरिंग ( Aerospace engineering ) का यह कोर्स करने के लिए काफी लग्न सटीकता और कड़ी मेहनत की जरूरत होती है।12वीं के बाद मैथ,फिजिक्स और केमिस्ट्री में काफी अच्छी पकड़ वाले छात्र इसमें दाखिला लेते हैं यह एक 4 वर्षीय इंजीनियरिंग कोर्स होता है इसे एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग भी कहते हैं। एयरो स्पेस इंजीनियरिंग का स्कोप काफी अच्छा है। लेकिन एयरोस्पेस इंजीनियरिंग ( Aerospace engineering ) ब्रांच में कई जटिल विषय है. एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होती है इसका सिलेबस काफी कठिन होता है जिससे छात्रों को 4 साल में पूरा करना कठिन हो जाता है लेकिन बीते वर्षों में इसकी डिमांड काफी बढ़ी है इस क्षेत्र में विदेश में काफी डिमांड है इस कोर्स को हाई पेइंग जॉब पर रखा गया है।

Why, Aerospace Engineering, BTech Course Difficult: एयरोस्पेस इंजीनियरिंग को काफी कठिन कोर्स में से एक माना जाता हैं। क्योंकि इस इंजीनियरिंग क्षेत्र में काफी विषयों पर फोकस किया जाता है जिसमें भौतिक,( physics's) गणित ( Math) मैटेरियल साइंस ,कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक जैसे कठिन विषयों पर गहन प्रैक्टिकल किया जाता है। 


Aerospace engineering: एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती है क्यों की यह एक जटिल और कंपलेक्स प्रोजेक्ट में से एक होता है जिसमें हवाई जहाज, अंतरिक्ष यान , मिसाइल , रॉकेट , ड्रोन जैसे कॉम्प्लेक्स यंत्रों को डिजाइन किया जाता है क्योंकि इसमें एक छोटी सी गलती बड़े खतरों का कारण बन सकती है इसलिए यह कोर्स काफी जटिल और कठिन होता हैं।


Specialisation in Aerospace engineering: अगर आप एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर या स्पेशलाइजेशन करना चाहते हैं। तो उसमें लंबी पढ़ाई की जरूरत होती है जिसमें प्रैक्टिकल प्रशिक्षण तथा मास्टर कोर्स करना होता है जिसमें कंपलेक्स सॉफ्टवेयर सिमुलेशन और टेस्टिंग प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। तथा साथ ही कई विषयों में एक साथ फोकस करना होता है जिसमें मैकेनिक, इलेक्ट्रिकल ,और कंप्यूटर साइंस से जुड़े कॉन्सेप्ट इस्तेमाल होते हैं। इसलिए यह कोर्स काफी जटिल और कठिन हो जाता हैं।

Read more: Medical Course Without NEET

Salary And Careers for, Aerospace Engineer: अगर आप एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में सक्सेसफुली करियर बना लेते हैं तो आपको 80 से 1 करोड़ सालाना पैकेज मिल सकता है जो अनुभव के साथ बढ़ता रहता है विदेश में इसकी काफी अच्छी पैकेज मिलती हैं। अगर भारत की बात कर तो एयरोस्पेस इंजीनियर की शुरुआती सैलरी 10 से 15 लाख रुपए सालाना हो सकती है जो उनके अनुभव के साथ और विशेषज्ञ हासिल होने के बाद करोड़ों रुपए तक जा सकती हैं। आपको इसरो ISRO, DRDO, डीआरडीओ HAL, बोइंग और एयरबेस, जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी मिल सकती हैं।


Aerospace Engineer कैसे बनें ?: एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए 12वीं में सभी विषयों में अच्छे अंक होने चाहिए तथा साथ ही फिजिक्स केमिस्ट्री मैथ (PCM) में 75% अंकों के साथ जेईई मेंस एडवांस में अच्छा स्कोर होना चाहिए। तथा साथ ही एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए टॉप कॉलेज का चयन करें जैसे आईआईटी IIT (मद्रास, मुंबई, दिल्ली) तथा साथ ही इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल के जरिए स्किल को बढ़ाएं.

नोट - किसी भी कोर्सेज में दाखिला लेने से पहले अच्छी से जानकारी ले ले यहां जो भी बताया गया है सामान्य जानकारी के लिए हैं।

For Best Requirement: The Travel of Gulf 








एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.